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Wednesday, 10 August 2016

अध्यक्ष की कुर्सी पर अमित शाह "ख़ासमख़ास" हैं



"बीजेपी के यूपी अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने भी स्वामी प्रसाद मौर्य के नाम पर नाक-भौं सिकोड़ी थीकिन्तु किन्तु ख़ासमख़ास अमित शाह के आगे भला किसकी क्या मजाल?"



भारतीय जनता पार्टी में यूं तो एक से बढ़कर एक धुरंधर नेता आये हैं, जिन्होंने अध्यक्ष पद की कुर्सी पर अपनी तशरीफ़ रखी है, पर कहना पड़ेगा कि अमित शाह जी इन सबमें 'ख़ास' हैं! ख़ास ही क्यों, बल्कि उन्हें 'ख़ासमख़ास' कहना ज्यादा उचित होगा. कोई ये न समझ ले कि 'ख़ास और ख़ासमख़ास' का सफर इतनी आसानी से तय किया जाता है, बल्कि उसके लिए 'ख़ास' काम भी करने पड़ते हैं, जिसे राजनीतिक भाषा में 'तीर' मारना कहते हैं. अमित शाह जी के तरकश में यूं तो कई तीर भरे हैं, जिन्हें वह अक्सर मारते ही रहते हैं किन्तु हाल के दिनों में उनके दो तीरों की ख़ास चर्चा है.

पहला तीर उन्होंने गुजरात में मारा है, जहाँ अविश्वस्त सूत्रों के अनुसार कहा जा रहा है कि 'साहेब' और 'बेन' की पसंद के बावजूद अमित शाह ने गुजरात फतह की गारंटी लेकर नितिन पटेल को पीछे छोड़ा और विजय रूपाणी को कमान दिलाई. कई खबरियों ने तो यह भेद खोल दिया कि आनंदीबेन और अमित शाह के बीच बैठकों में तू-तू, मैं-मैं भी हुई. पर मूल बात यह है कि अमित शाह का तीर यहाँ निशाने पर लगा और तीर निशाने पर लगते ही अमित भाई, गुजरात छोड़कर यूपी जा पहुंचे!

यूं तो अमित शाह के तगड़े कन्धों पर पूरे देश में भाजपा की जिम्मेदारी है, किन्तु गुजरात और यूपी का तो उन्हें पूरा ठेका मिल गया है. ऐसे में गुजरात-यूपी, गुजरात-यूपी करना उनकी मजबूरी और आने वाले समय की मजबूती भी बन सकता है.

खैर, गुजरात की समस्या सुलझाने के बाद अमित शाह के निशाने पर यूपी का एक बड़ा कैच पकड़ना था और उन्होंने बीएसपी से अलग हुए स्वामी प्रसाद मौर्य को बीजेपी में शामिल कराकर यह कैच सफलतापूर्वक पकड़ लिया. यूपी में चार बार विधायक रहे स्वामी प्रसाद मौर्या  हालिया दिनों में काफी चर्चित रहे, जब उन्होंने बीएसपी सुप्रीमो मायावती पर टिकट बेचने का आरोप लगाया. यूपी में भी अविश्वस्त सूत्र बताते हैं कि 'शाह' हर हाल में यूपी का जातीय गणित दुरुस्त करने में लगे हुए हैं, जहाँ अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में 8% मौर्य और कुशवाहा वोटों पर उनका यह तीर निशाने पर लग सकता है. यूपी राजनीति को समझने का अमित शाह दावा और दांव तो खूब चल रहे हैं, हालाँकि यूपी के कई नेता उनकी गुजराती स्टाइल को समझ नहीं पा रहे हैं. खबर तो यह भी है कि बीजेपी के यूपी अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने भी स्वामी प्रसाद मौर्य के नाम पर नाक-भौं सिकोड़ी थी, किन्तु किन्तु ख़ासमख़ास अमित शाह के आगे भला किसकी क्या मजाल!

वैसे, कुछ ऐसा ही प्रयोग उन्होंने बिहार में 'मांझी' नामक कैच पकड़ कर किया था, पर तौबा-तौबा बिहार की याद कहाँ आ गयी, क्योंकि इस प्रदेश ने तो बिचार अमित शाह की 'हैट्रिक' ख़राब कर दी थी, अन्यथा हरियाणा, महाराष्ट्र के बाद…..!!

खैर, बिहार की कड़वी यादों को वह पीछे छोड़ चुके हैं और यूपी इलेक्शन में अपने 'ख़ास तीरों' से वह जीत की ओर कदम बढ़ाने में लग गए हैं.