300 मिलियन डॉलर का टर्नओवर करते चिरीपाल ग्रूप का शैक्षणिक घोटाला, एसबीएस मे फर्जीवाडा
चिरीपाल ग्रूप द्वारा संचालित शांति बिजिनेस स्कूल(एसबीएस) मे दिया जाता बैचलर ऑफ कॉमर्स(बीबीए) की यूजीसी द्वारा मान्य नही है. अहमदाबाद के टॉप बिजिनेस स्कूल मे शामिल एसबीएस, डाइरेक्टर अरबिंद सिन्हा के मुताबिक, छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर की डा. सी.वी. रमन यूनिवर्सिटी से संग्लन है. डा. सी.वी. रमन यूनिवर्सिटी एक निजी संस्था है. यूजीसी के अनुसार यूनिवर्सिटी के पास संलग्नता देने का अधिकार ही नही है. ऐसे मे एसबीएस द्वारा किया गया बीबीए सिर्फ एक टाइमपास है.
क्या है मामला
शहर के नामी इन्डीस्ट्रियालिस्ट वेदप्रकाश चिरीपाल के द्वारा संचालित एसबीएस को गुजरात के टॉप बिजिनेस स्कूल में एक माना जाता है. 3.45 लाख फीस और फाइव स्टार सुविधाओं से लैस इस स्कूल को 2010 मे चिरीपाल ग्रूप द्वारा शुरु किया गया. इस कॉलेज मे डिग्री और डिप्लोमा दो तरह के कोर्स पढ़ाये जाते है. डिग्री कोर्स मे बीबीए कराया जाता है वही पोस्ट ग्रेजुएट मे डिप्लोमा कराया जाता है. इसमे बीबीए फर्जी है.
कैसे फर्जी है बीबीए कोर्स?
डिप्लोमा के लिये मान्यता नही चाहिये लेकिन डिग्री के लिये किसी भी कॉलेज को यूजीसी से मान्यता प्राप्त करना होता है अथवा यूजीसी अधिकारिक यूनिवर्सिटी से संलग्नता लेना पड़ता है. फिर वही यूनिवर्सिटी संलग्न कॉलेज के समस्त छात्रों को डिग्री प्रदान करती है. लेकिन कहे अनुसार बीबीए की डिग्री देने के लिये एसबीएस जिस डा. सी. वी. रमन यूनिवर्सिटी छत्तीसगढ़ से संलग्न है वह किसी भी ऑफ सेंटर(राज्य से बाहर) संस्था को संलग्नता देने की अधिकारिक नही है.
डा. सी. वी. रमन यूनिवर्सिटी कैसे अधिकारिक नही है?
यूजीसी के अनुसार निजी यूनिवर्सिटी किसी भी संस्था, कॉलेज को संलग्नता नही दे सकती. वे अपने राज्य के बाहर कोई सेंटर्स नही शुरु कर सकती. यदि उनको राज्य के बाहर सेंटर्स शुरु करना है तो पहले अपने राज्य में पांच साल पूरा करें. पांच साल पूरा हो जाने पर यूजीसी को अन्य राज्य में सेंटर्स शुरु करने के लिये सूचित करें. फिर यूजीसी से अनुमोदन मिलने के बाद अन्य राज्य मे अपना सेंटर्स शुरु कर सकते हैं. लेकिन अभी तक यूजीसी ने किसी भी निजी यूनिवर्सिटी को अन्य राज्य में सेंटर्स शुरु करने का अनुमोदन नहीं दिया है.
यूजीसी द्वारा एक सार्वजनिक सूचना भी निजी यूनिवर्सिटीस को दिया गया है. जिसमें यूजीसी ने कहा है,"ऐसा जानने को मिला है कि कुछ निजी यूनिवर्सिटीस कॉलेज को मान्यता दे कर ऑफ सेंटर्स शुरु कर रहें हैं. यह यूजीसी के अधिनियम(एस्टॅब्लिशमेंट ऑफ एंड मेंटेनेन्स ऑफ स्टॅंडर्ड्स इन प्राइवेट यूनिवर्सिटीस) 2003 का उल्लंघन और प्रो. यश पाल एवम् अन्य बनाम छत्तीसगढ़ राज्य एवम् अन्य के मामले मे माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिये गये फैसले का उल्लंघन है.
इस सार्वजनिक सूचना के साथ यूजीसी ने 234 यूनिवर्सिटीस का नाम भी दिया है जो किसी भी कॉलेज-ऑफ सेंटर्स को संलग्नता नहीं प्रदान कर सकती. इसमें डा. सी. वी. रमन यूनिवर्सिटी का नाम भी आता है.
क्या कह रहे एसबीएस डाइरेक्टर?
डाइरेक्टर अरबिंद सिन्हा के साथ जब इस बारे में फोन काल किया गया तो उन्होने कहा, "हमारी संलग्नता के साथ है लेकिन इस बारे में मुझे और अधिक जानकारी नही है." वहीं इस बारे में अधिक जानकारी के लिये हयर एज्युकेशन कमिश्नर ए. जे. शाह से संपर्क स्थापित करने की कोशिश नाकामयाब रही.
क्या कह रहे डा. सी. वी. रमन यूनिवर्सिटी के कुलसचिव?
संदेश डॉट काम ने जब इस बारे मे डा. सी. वी. रमन यूनिवर्सिटी, छत्तीसगढ़ के कुलसचिव शैलेश पाण्डेय से बात की तो उन्होने इस प्रकार के किसी भी संलग्नता से इंकार किया. बकौल कुलसचिव," हमारा छत्तीसगढ़ के बाहर कोई सेंटर नही है. अगर ऐसा कुछ कोई बोल रहा तो वह फर्जी है."
क्या हो सकता है?
यूजीसी द्वारा जारी उपरोक्त नियमानों के अनुसार डा. सी. वी. रमन यूनिवर्सिटी से संलग्नता एवम् एसबीएस से बीबीए सिर्फ एक शैक्षणिक घपलेबाजी बन के रह जाता है. उसपर यूनिवर्सिटी के कुलसचिव के बयान ने बाकी बचे, एसबीएस के बचाव के मौके पर भी गतिरोध लगा दिया है. अब यूजीसी या तो अपने नियमन मे बदलाव लाये या फिर एसबीएस से बीबीए कर रहे बच्चों की डिग्री सिर्फ एक रद्दी कागज रह जायेगी.
क्या होना चाहिये?
यूजीसी को इस मामले पर संज्ञान लेना चाहिये. इस पर एक कमिटी गठित कर के दोषिए तुरंत इस पर कार्रवाई करनी चाहिये. वही जो 100 के आस-पास बच्चे यहाँ से पढ रहे हैं, कुछ फाइनल ईयर मे है, उनके लिये कोई वैकल्पिक व्यवस्था करना चाहिये! क्योंकि संस्थाओं का दोष हो सकता है इसमें लेकिन बच्चों को का तो नहीं है. जिन्होने लाखो रुपये खर्च करके यहाँ से पढ़ाई की है सबका भविष्य लाखो खर्च करने के बाद अंधेरे मे है.
Published: http://www.sandesh.com/article.aspx?newsid=3229930
चिरीपाल ग्रूप द्वारा संचालित शांति बिजिनेस स्कूल(एसबीएस) मे दिया जाता बैचलर ऑफ कॉमर्स(बीबीए) की यूजीसी द्वारा मान्य नही है. अहमदाबाद के टॉप बिजिनेस स्कूल मे शामिल एसबीएस, डाइरेक्टर अरबिंद सिन्हा के मुताबिक, छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर की डा. सी.वी. रमन यूनिवर्सिटी से संग्लन है. डा. सी.वी. रमन यूनिवर्सिटी एक निजी संस्था है. यूजीसी के अनुसार यूनिवर्सिटी के पास संलग्नता देने का अधिकार ही नही है. ऐसे मे एसबीएस द्वारा किया गया बीबीए सिर्फ एक टाइमपास है.
क्या है मामला
शहर के नामी इन्डीस्ट्रियालिस्ट वेदप्रकाश चिरीपाल के द्वारा संचालित एसबीएस को गुजरात के टॉप बिजिनेस स्कूल में एक माना जाता है. 3.45 लाख फीस और फाइव स्टार सुविधाओं से लैस इस स्कूल को 2010 मे चिरीपाल ग्रूप द्वारा शुरु किया गया. इस कॉलेज मे डिग्री और डिप्लोमा दो तरह के कोर्स पढ़ाये जाते है. डिग्री कोर्स मे बीबीए कराया जाता है वही पोस्ट ग्रेजुएट मे डिप्लोमा कराया जाता है. इसमे बीबीए फर्जी है.
कैसे फर्जी है बीबीए कोर्स?
डिप्लोमा के लिये मान्यता नही चाहिये लेकिन डिग्री के लिये किसी भी कॉलेज को यूजीसी से मान्यता प्राप्त करना होता है अथवा यूजीसी अधिकारिक यूनिवर्सिटी से संलग्नता लेना पड़ता है. फिर वही यूनिवर्सिटी संलग्न कॉलेज के समस्त छात्रों को डिग्री प्रदान करती है. लेकिन कहे अनुसार बीबीए की डिग्री देने के लिये एसबीएस जिस डा. सी. वी. रमन यूनिवर्सिटी छत्तीसगढ़ से संलग्न है वह किसी भी ऑफ सेंटर(राज्य से बाहर) संस्था को संलग्नता देने की अधिकारिक नही है.
डा. सी. वी. रमन यूनिवर्सिटी कैसे अधिकारिक नही है?
यूजीसी के अनुसार निजी यूनिवर्सिटी किसी भी संस्था, कॉलेज को संलग्नता नही दे सकती. वे अपने राज्य के बाहर कोई सेंटर्स नही शुरु कर सकती. यदि उनको राज्य के बाहर सेंटर्स शुरु करना है तो पहले अपने राज्य में पांच साल पूरा करें. पांच साल पूरा हो जाने पर यूजीसी को अन्य राज्य में सेंटर्स शुरु करने के लिये सूचित करें. फिर यूजीसी से अनुमोदन मिलने के बाद अन्य राज्य मे अपना सेंटर्स शुरु कर सकते हैं. लेकिन अभी तक यूजीसी ने किसी भी निजी यूनिवर्सिटी को अन्य राज्य में सेंटर्स शुरु करने का अनुमोदन नहीं दिया है.
यूजीसी द्वारा एक सार्वजनिक सूचना भी निजी यूनिवर्सिटीस को दिया गया है. जिसमें यूजीसी ने कहा है,"ऐसा जानने को मिला है कि कुछ निजी यूनिवर्सिटीस कॉलेज को मान्यता दे कर ऑफ सेंटर्स शुरु कर रहें हैं. यह यूजीसी के अधिनियम(एस्टॅब्लिशमेंट ऑफ एंड मेंटेनेन्स ऑफ स्टॅंडर्ड्स इन प्राइवेट यूनिवर्सिटीस) 2003 का उल्लंघन और प्रो. यश पाल एवम् अन्य बनाम छत्तीसगढ़ राज्य एवम् अन्य के मामले मे माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिये गये फैसले का उल्लंघन है.
इस सार्वजनिक सूचना के साथ यूजीसी ने 234 यूनिवर्सिटीस का नाम भी दिया है जो किसी भी कॉलेज-ऑफ सेंटर्स को संलग्नता नहीं प्रदान कर सकती. इसमें डा. सी. वी. रमन यूनिवर्सिटी का नाम भी आता है.
क्या कह रहे एसबीएस डाइरेक्टर?
डाइरेक्टर अरबिंद सिन्हा के साथ जब इस बारे में फोन काल किया गया तो उन्होने कहा, "हमारी संलग्नता के साथ है लेकिन इस बारे में मुझे और अधिक जानकारी नही है." वहीं इस बारे में अधिक जानकारी के लिये हयर एज्युकेशन कमिश्नर ए. जे. शाह से संपर्क स्थापित करने की कोशिश नाकामयाब रही.
क्या कह रहे डा. सी. वी. रमन यूनिवर्सिटी के कुलसचिव?
संदेश डॉट काम ने जब इस बारे मे डा. सी. वी. रमन यूनिवर्सिटी, छत्तीसगढ़ के कुलसचिव शैलेश पाण्डेय से बात की तो उन्होने इस प्रकार के किसी भी संलग्नता से इंकार किया. बकौल कुलसचिव," हमारा छत्तीसगढ़ के बाहर कोई सेंटर नही है. अगर ऐसा कुछ कोई बोल रहा तो वह फर्जी है."
क्या हो सकता है?
यूजीसी द्वारा जारी उपरोक्त नियमानों के अनुसार डा. सी. वी. रमन यूनिवर्सिटी से संलग्नता एवम् एसबीएस से बीबीए सिर्फ एक शैक्षणिक घपलेबाजी बन के रह जाता है. उसपर यूनिवर्सिटी के कुलसचिव के बयान ने बाकी बचे, एसबीएस के बचाव के मौके पर भी गतिरोध लगा दिया है. अब यूजीसी या तो अपने नियमन मे बदलाव लाये या फिर एसबीएस से बीबीए कर रहे बच्चों की डिग्री सिर्फ एक रद्दी कागज रह जायेगी.
क्या होना चाहिये?
यूजीसी को इस मामले पर संज्ञान लेना चाहिये. इस पर एक कमिटी गठित कर के दोषिए तुरंत इस पर कार्रवाई करनी चाहिये. वही जो 100 के आस-पास बच्चे यहाँ से पढ रहे हैं, कुछ फाइनल ईयर मे है, उनके लिये कोई वैकल्पिक व्यवस्था करना चाहिये! क्योंकि संस्थाओं का दोष हो सकता है इसमें लेकिन बच्चों को का तो नहीं है. जिन्होने लाखो रुपये खर्च करके यहाँ से पढ़ाई की है सबका भविष्य लाखो खर्च करने के बाद अंधेरे मे है.
Published: http://www.sandesh.com/article.aspx?newsid=3229930





